हिंद से हिन्दी, हिंद और हिन्दीओं ने, मतलब, सभी भारतीयों ने सहे कितने सितम

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हिन्दी
हिंद से हिन्दी,  हिंद और हिन्दीओं ने,
मतलब, सभी भारतीयों ने सहे कितने सितम,
हिंद का उल्टा होता है दहीं,
दधि मंथन से उभरता है नवनित,
भारत की सभी भाषाओं का  नेतृत्व करती,
सभी भारतीय भाषाओं, सभी भारतीयों


की एकता साधतीं हुई चली,
राष्ट्र भाषा, राज भाषा, विश्व भाषा,
होने नीकली, हिन्दी की सवारी,
हिंद, हिन्दीओं, हिन्दी ने सहे कितने सारे सितम,
इसलिए तो कहा है, सितम्बर में  आता है,
हिन्दी दिवस -१४ सितम्बर,
सितम्बर= सितम+ अंबर
सितम- अंबर- नवनीत कार संमिश्रण है हिन्दी।
हिन्दी के हैदराबाद के असवार है,
१६ सितम्बर को अवतरित,
मिथिला प्रदेश का सशक्त बीज,
जिन्होंने  हिन्दी विकास के लिए,
अपना जीवन समर्पित किया,
अहिल्या मैडम मिश्र
जो ब्याह कर आ गयें हैदराबाद,
उन्होंने हिन्दी के लिए करें तीव्र संघर्षो-घर्षण,
हिन्दी के लिए सही कितनी वेदना,
हिन्दी के लिए किया कितने सारे आक्रोश,
अहिल्या मैडम हिन्दी को  करें सोलह श्रृंगार,
अहिल्या मैडम मिश्र बनें हिन्दी के हरसिंगार,
हिन्दी की सेवा करते करते, हिन्दी का प्रचार प्रसार करते करते आज बन गये हैं,
हिन्दी का विशाल घना वटवृक्ष।
अपनें वालों सभी के पास, हिन्दी की सेवा कराते हुए , हिन्दी  भाषा का उत्थान करते हैं।
हिन्दी भाषा की सभी तरह की लेखन सामग्री
लिखने वाले, सभी को एक साथ जोड़तीं हैं,
सभी को  हिन्दी लेखन के प्रति प्रेरित करतीं हैं,
हिन्दी को आगे बढ़ाना, बस यही है आपकी
सभी प्रवृत्ति, नहीं लेंगी कभी साहित्य जगत से निवृत्ति।
पक्षी माताओं  अपने बच्चों को जिस प्रकार,
दुग्ध पान करातीं है, ठीक उसी प्रकार,
अपने रचनाकारों से रचनाओं का उद्भव करातीं है,  पारस के जैसे लोहे को सोना बनातीं हैं,
कच्चे हीरें को पासे दार, चमकदार  असली
हीरा  बनातीं हैं।
भारतीय नारी आप की जय हो।
भावना मयूर पुरोहित हैदराबाद
11/9/2021/

TejGujarati