ह्रदय परिवर्तन. – भावना मयूर पुरोहित. हैदराबाद.

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बासमती
रूपगर्विता का ह्रदय परिवर्तन :
“मंगा रही हु, मैं बासमती,
किंतु आप यह तो पुछिए की
मैं बासमती क्यु मंगा रही हु?
बासमती के प्रसाद से,
मैं अपने घरको बना दुंगी,
प्रासाद!!!
बासमती की खुश्बू
इतनी फैलाउंगी की
जैसे मंदिर में,
धुपसली की महेक।
प्रथम अर्पित करूँगी
बासमती सामग्री, गणेश को.
गणेशजी को कहुँगी,
“आप पधारे मेरे घर,
रिद्धि-सिद्धि के साथ.”
बासमती की सामग्री से,
कुलदेवता एवं कुलदेवी
का करूँगी नैवेद्य,
जो आने नहीं देंगे,
मेरे घर में वैध.
सफेद बासमती अर्पित करूँगी,
माता सरस्वती को.
शारदा को कहुँगी,
“ब्रह्मा जी को कहो,
मेरे पास कराओ,
अच्छा मानस सर्जन,
जो दे सकते हैं,
ज्ञान के साथ गम्मत।
कुमकुम युक्त बासमती,
अर्पित करूँगी मैं
माता कालिका को।
कालिका माता को कहुँगी,
” हर को बुलाकर कहो,
मेरे लिए, हे हर,
मेरे दु:खडें हर
हे शंकर हर लो,
मेरे जीवन में से कंकर.
करा दो विसर्जन,
मेरे में से दुर्जन।
बना दो मुजे सज्जन।”
हल्दी युक्त बासमती,
अर्पित करूँगी मैं,
देवी लक्ष्मी को।
लक्ष्मी माता को कहुँगी,
“हे लक्ष्मी बनाओ,
मुजे अच्छी ग्रुह लक्ष्मी.
संभालो मेरी संपत्ति_संतति.
आने न दो घरमें कभी आपत्ति.
घरमें शुभकार्य के लिए,
मुजे चाहिए आपकी संमति.
मेरा भी कुछ ऋण है,
समाज प्रति।
देवी लक्ष्मी माता,
आप के साथ बुलाओ,
आप के पति,
जिनका नाम हैं विष्णु.
विष्णु को कहो,
मेरी ओर से,
हे विष्णु!!!
कर दो मुजे सहिष्णु।
मिटा दो मेरे जीवन
की एषणा।
जो है मृगतृष्णा.
बाद में रूपगर्विता
कहती है,
“अभी चाहिए,
मुजे बासमती पूजा के लिए.
टुटी मेरे दिल की भ्रांति.
मुजे चाहिये
घर में शांति.
नहीं चाहिये मुजे अशांति.
मैं अभी कभी भी,
‘स्त्री हट’ नहीं करूँगी.
मेरी ‘स्त्री हट’ _ जीद्द
करने की वृत्ति में,
‘ह्रदय परिवर्तन’
हो गया है.
कोई भी संजोगो में,
मैं हुँ आपकी श्रीमती,
और आप हैं,
मेरे प��
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