कविता का शीर्षक : होली आयी…. होली आयी रे……. होली के दिनों में लगती है तू बड़ी रंगीली। ऐसे भी सूरत है तेरी बड़ी भोली। – कवि : शैलेष पटेल.

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कविता का शीर्षक : होली आयी…. होली आयी रे…….
होली के दिनों में लगती है तू बड़ी रंगीली।
ऐसे भी सूरत है तेरी बड़ी भोली।।

जब से मिला है तेरे जैसा हमजोली।
तब से भगवान ने मेरी किस्मत है खोली।।

तेरे संग क्या खेलेंगे हम होली।
हम तो सूनते रहते है तेरी बोली।।
जो कि है वह सच में शक्कर की गोली।
और उपर से है तू दिल की बड़ी भोली-भाली।।

सोचा था कैसे खेलेंगे हम होली।
पर जब से मिला है तेरे जैसा हमजोली।
तो फिर क्यूँ न खेलें हम होली।।

आओ, सब मिलकर खेलेंगे हम होली।
……. आज है होली…. ।।
( कवि : शैलेष पटेल)

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