ओ स्त्री सुनो ना……हक है तुम्हें भी चुराने का कुछ लम्हे….शाम की चाय की चुस्कीयों के लिए.

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*ओ स्त्री*

*सुनो ना……*

*हक है तुम्हें भी*

*चुराने का*

*कुछ लम्हे….*

*शाम की चाय की चुस्कीयों के लिए*

*कोई गुनाह नहीं है थक जाना*

*कोई अपराध नहीं है ना कह देना*

*तुम्हें जरूरत नहीं कि हर बार साबित करो*

*तुम कितनी मजबूत हो*

*जरूरी है कभी-कभी*

*टूट कर बिखर जाना भी*

*तुम्हें जरूरत नहीं कि तुम साबित करो*

*कि तुम हो …..:-*

*-एक फरमाबरदार बीवी*

*-एक जिम्मेदार मां*

*पूरा हक है तुम्हें …:-*

*-कभी लापरवाह भी हो जाओ*

*-कभी कुछ भूल भी जाओ*

*-कुछ पल जियो खुद के लिए भी*

*-कभी भूल कर सारे काम*

*-गुनगुनाओ कोई गीत*

*भूल जाओ ….*

*रसोई में पड़े बर्तनों को*

*चादरों में पड़ी सलवटो को*

*अधूरे पड़े ऑफिस के कामों को*

*बिखरे पड़े घर को*

*बस याद रखो*

*कि तुम एक स्त्री हो*

*कोई मशीन नहीं*

*ईश्वर भी नहीं*

*क्योंकि तुम तुम हो*

*और तुम जैसा कोई नहीं*

*ना बना है तुम जैसा कोई*

*और ना बन पाएगा*

*तुम अनूठी हो…*

*खूबसूरत हो….*

*अनुपम हो…..*

*हर तरह से काबिल हो..*

*बस इसे साबित ..*

*करने की कोशिश ना करो*

*बस जियो कुछ पल ..*

*खुलकर खुद के लिए भी…….

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TejGujarati