गुजरात के विसनगर के पास आया हुआ उमता गांव क्यों विश्व में प्रसिद्ध हुआ है।?

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अपनो ने जिन्हें छोड़ा हो। उनके लिए अपना घर का मतलब अपना घर आश्रम।
महेसाणा के पास आया हुआ छोटा सा उमता गांव अपने आप में मानवता की मिसाल हे।
आईए। इस बेमिसाल घरकी कहानी अपने आप ही बहुत कुछ कह जाती है।



उमता गावमे मानवतावादी विचारों के साथ समाज में परिवार से जुदा हुए और मंदबुद्धि,लाचार, बिना घर के और बीमारी से जूझ रहे लोगों को आश्रम में लाकर उनकी सेवा की जाती है। उमता गांव में आया हुआ यह आश्रम ऐसे लोगों के लिए सहारा है, जिनका कोई सहारा नहीं होता। और ऐसे लोग जो दर दर भटकते रहते हैं, उनके लिए खुद का घर का मतलब अपना आश्रम। ऐसे निराश्रित लोगों को घर में लाकर उनके बाल काटना, उनको नहलाना, उनके लिए अच्छे कपड़े और भोजन की व्यवस्था करना और उनकी आरोग्य से जुड़ी हुई सभी सुविधाएं देकर उन्हें मुक्त वातावरण में जीवन बिताने की सहुलियत देना यही उनका लक्ष्य है।

इस घर में रहने वाले बहुत लोग पढ़े लिखे हैं। कुछ होशियार भी है। लेकिन तकलीफ की वजह से इनकी मानसिकता में असर हुई होती है जिसकी वजह से परिवार और समाज के साथ उनका नाता टूट जाता है, और खुद के परिवार से ही बिछड़ जाते हैं। लेकिन अपना घर में आकर आज यह तमाम प्रभुजी स्वर्ग में हो, ऐसी खुशी महसूस कर रहे हैं। तो कई लोग अपना घर में आकर स्वस्थ होकर अपने परिवार के पास वापस भी चले गए हैं, और एक बेहतर जिंदगी जीने लगे हैं।अपना घर आश्रम का एक ही उद्देश्य है, “मानव सेवा ही प्रभु सेवा” है।
आश्रम की गतिविधियां मीडिया ने भी काफी उजागर किया है

 

TejGujarati
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