कोरोना के वार से कोई नही बच सकता है। थोड़ी सी लापरवाही , आपकी जिंदगी ले सकती है*

સમાચાર

*आगरा के कमिश्नर अनिल कुमार के माता-पिता कोरोना पॉजिटिव थे और उनका इलाज चल रहा था. उनकी मां को नोएडा के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन वह जिंदगी की जंग हार गईं. इससे एक दिन पहले ही अनिल कुमार ने अपने पिता का अंतिम संस्कार किया था. उनकी चिता अभी ठंडी भी नहीं हुई थी, कि अनिल कुमार को मां के निधन की सूचना मिल गई.* कमिश्नर की *बहन भी कोरोना पॉजिटिव हैं.*

निसंदेह *अनिल कुमार अकेले ऐसे शख्स नहीं हैं, जिन्हें कोरोना ने कभी न भूलने वाला गम दिया है,* लेकिन *वह सामान्य लोगों की तुलना में शक्तिशाली जरूर हैं.* वह *पूरे आगरा मंडल के मुखिया हैं, उनके पास शायद ही किसी चीज की कमी हो, लेकिन इसके बावजूद वह कोरोना के काल से अपने माता-पिता को नहीं बचा सके.*

*यह घटना एक उदाहरण है कि कोरोना के कहर से कोई भी अछूता नहीं है. वह ‘सामान्य’ और ‘शक्तिशाली’ में कोई भेद नहीं करता. जब साधन-सुविधा संपन्न व्यक्ति कोरोना का शिकार बन सकते हैं, तो आम आदमी उसके लिए एक सॉफ्ट टारगेट है.*

इसलिए *कोरोना वायरस की भयावहता को कमतर आंकने की गलती जानलेवा साबित हो सकती है*.

*देशव्यापी लॉकडाउन खत्म होने के बाद से कोरोना को लेकर जो डर था, वह भी खत्म होने लगा है.*

*‘जो होगा देखेंगे’ जैसी मानसिकता हावी हो गई है. यही वजह है कि पॉजिटिव मामलों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है. सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क लगाने जैसे नियमों का उल्लंघन आम हो गया है.*

*अधिकांश लोग यह मान बैठे हैं कि उन्हें कोरोना नहीं होगा.* जबकि *विशेषज्ञ कई बार यह साफ कर चुके हैं कि वायरस का प्रकोप कम नहीं हुआ है और छोटी सी लापरवाही भी जानलेवा बन सकती है.*

आगरा मंडल के मुखिया *अनिल कुमार ने अपने माता-पिता को बचाने के हर संभव प्रयास किये होंगे, मगर उनका रुतबा ‘बीमारी’ के आगे फीका पड़ गया. वह सब कुछ करके भी कुछ नहीं कर सके.*

*यह घटना एक संकेत है कि कोरोना के वार से कोई नही बच सकता है। थोड़ी सी लापरवाही , आपकी जिंदगी ले सकती है*..।

*सावधान रहिए , सुरक्षित रहिए*????

TejGujarati