*श्री राम ने शबरी से नवधा भक्ति कही……*

આંતરરાષ્ટ્રીય ગુજરાત ભારત સમાચાર

*1- प्रथम भक्ति है साधु संतो का संग करना चाहिए।*
*2- दूसरी भगवान के कथा प्रसंगो मे प्रेम अर्थात रूचि रखना जहाँ कथा प्रसंग मिले मन लगाकर श्रवण करें।।*
*3- तीसरी भक्ति है, अभिमान रहित होकर गुरु के चरण कमलों की सेवा करनी चाहिए।*
*4-चौथी भक्ति है कपट छोड़कर प्रभु के गुण समूहों का गान करना चाहिए।*
*5-पाँचवी भक्ति है, राम नाम मन्त्र का जाप और प्रभु मे दृढ़ विश्वास रखना, यही वेदों में भी कहा गया है।।*
*6- इन्द्रियों का निग्रह शील बहुत कार्यों से वैराग्य निरंतर संतो के धर्म आचरण मे रहना।*
*7-सातवीं भक्ति है, सम्पूर्ण जगत को राममय देखना और संतो को प्रभु से से अधिक मानना।।*
*8- आठवीं भक्ति जो मिल जाये उसी मे संतोष करना स्वप्न मे भी पराये दोषों को ना देखना।*
*9- नवी एवं अंतिम भक्ति सरलता और सबके साथ कपट रहित बर्ताव करना हृदय में प्रभु का भरोसा रखना किसी भी अवस्था मे हर्ष विषाद न होना।।*
*इन नवों में से जिनके एक भी भक्ति होती है। वह प्रभु को अत्यंत प्रिय है।।*
*जय श्री राम ???*

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